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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Mar 2021

    बीती विभावरी जाग री!

    दो दिन पहले ही मैंने छायावाद युग के एक स्तंभ रहे स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर की थी| आज इसी युग के एक और महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| प्रसाद जी को उनके महाकाव्य- ‘कामायनी’ के लिए विशेष रूप से जाना जाता है| आज की इस…

  • 27th Mar 2021

    जो अपराधी नहीं होंगे, मारे जाएँगे!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री राजेश जोशी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, रचना अपनी बात स्वयं कहती है, इसलिए मैं अलग से कुछ नहीं कहूँगा, कुल मिलाकर यह विपरीत स्थितियों का सामना स्वाभिमान और खुद्दारी के साथ करने का संदेश देने वाली रचना है| लीजिए आज प्रस्तुत है, श्री…

  • 26th Mar 2021

    ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| वसीम बरेलवी साहब की एक गज़ल याद आ रही है, बस उसके शेर एक-एक करके शेयर कर लेता हूँ। बड़ी सादगी के साथ बड़ी सुंदर बातें की हैं, वसीम साहब ने इस गज़ल में। पहला शेर तो वैसा ही है, जैसा हम कहते हैं, कोई बहुत…

  • 25th Mar 2021

    काले कपड़े पहने हुए सुबह देखी!

    कल मैंने अपने एक संस्मरण में, एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अन्य लोगों के साथ स्वर्गीय कुमार शिव जी को भी याद किया था और उनके एक-दो गीतों का उल्लेख किया था| आज उनको श्रद्धांजलि स्वरूप उनका एक पूरा गीत यहाँ दे रहा हूँ| इस गीत में उन्होंने अपनी खुद्दारी की प्रभावी अभिव्यक्ति…

  • 24th Mar 2021

    फ्यूज बल्बों के अद्भुद समारोह में!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अपनी शुरू की ब्लॉग-पोस्ट्स में मैंने अपने जीवन के कुछ प्रसंगों, कुछ घटनाओं के बारे में लिखा था। आज जयपुर नगरी से जुड़ा एक बहुत पुराना प्रसंग दोहरा रहा हूँ। श्रेष्ठ नवगीतकार श्री कुमार शिव जी की मृत्यु का दुखद समाचार मिला, उनकी स्मृति में यह…

  • 23rd Mar 2021

    वो गुत्थी आज तक सुलझा रहा हूँ!

    आज उर्दू के उस्ताद शायर रहे ज़नाब फ़िराक़ गोरखपुरी साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| एक खास बात ये है की हिन्दी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी भी अंग्रेजी के प्रोफेसर थे और ज़नाब फ़िराक़ गोरखपुरी साहब भी| लीजिए आज प्रस्तुत है, फ़िराक़ गोरखपुरी साहब की ये खूबसूरत ग़ज़ल- सितारों…

  • 22nd Mar 2021

    अक्सर एक व्यथा यात्रा बन जाती है!

    ब्लॉग लेखन हो या जो भी गतिविधि हो, अक्सर हम वह चीज़ें, वे रचनाएँ अधिक शेयर करते हैं, जो ‘हमारे समय’ की होती हैं| जैसे फिल्मों की बात होती है तो मुझे वो ज़माना अधिक याद आता है जिसमें दिलीप कुमार जी, देव आनंद और मेरे प्रिय राज कपूर जी थे, गायकों में मुकेश जी,…

  • 21st Mar 2021

    सामने बैठा था मेरे, और वो मेरा न था!

    आज एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसके कुछ शेर ग़ुलाम अली जी ने और जगजीत सिंह तथा चित्रा सिंह की जोड़ी ने भी गाए हैं| काफी लंबी ग़ज़ल है ये और सिर्फ एक घटना हो जाने पर ज़िंदगी कितनी बदल जाती है, ये इसमें बहुत खूबसूरती से दर्शाया गया है| लीजिए आज प्रस्तुत है,…

  • 20th Mar 2021

    जग से परिचय, तुमसे परिणय!

    कविताएं शेयर करने के क्रम में, मैं सामान्यतः आधुनिक कवियों की रचनाएँ शेयर करता हूँ और इसमें फिल्मों से जुड़े रचनाकारों को भी शामिल कर लेता हूँ, क्योंकि फिल्मों में भी अनेक श्रेष्ठ रचनाकारों ने अपना योगदान दिया है| आज मैं छायावाद युग के एक स्तंभ रहे स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर…

  • 19th Mar 2021

    आग पानी में लगाते हुए हालात की रात!

    पुराने फिल्मी गीतों को सुनकर यही खयाल आता है कि कितनी मेहनत करते थे गीतकार, संगीतकार और गायक भी उन गीतों की अदायगी में जैसे अपनी आत्मा को उंडेल देते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है, 1960 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बरसात की रात’ के लिए रफ़ी साहब का गाया यह गीत, जिसे लिखा था साहिर…

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