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इंसान की ख़ुश्बू आती है!
भारतीय उपमहाद्वीप के एक अत्यंत लोकप्रिय शायर रहे क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| क़तील शिफ़ाई साहब पाकिस्तान के निवासी थे और उन्होंने अत्यंत खूबसूरत ग़ज़लें लिखी हैं जो बहुत लोकप्रिय हुई हैं और ग़ुलाम अली, जगजीत सिंह आदि प्रमुख गायकों ने उनको गाया है| लीजिए प्रस्तुत है क़तील शिफ़ाई…
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उसे तुम भी भूल जाओ!
भारतीय उपमहाद्वीप के एक अत्यंत लोकप्रिय शायर रहे स्वर्गीय अहमद फ़राज़ साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| अहमद फ़राज़ साहब पाकिस्तान के निवासी थे और उन्होंने अत्यंत खूबसूरत ग़ज़लें लिखी हैं जो बहुत लोकप्रिय हुईं और ग़ुलाम अली, जगजीत सिंह आदि प्रमुख गायकों ने उनको गाया है| लीजिए प्रस्तुत है अहमद फ़राज़…
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I am worried for God Almighty!
Today I am going for the easier option, provided through #IndiSpire prompt for the week. The challenge is that we write a short story only in three lines. Now since the story has to be only in 3 lines, the introduction could be bigger! I am not sure whether the short story would be as…
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उनकी याद, उनकी तमन्ना, उनका ग़म!
शकील बदायुनी साहब भारत के एक जाने–माने शायर थे और हिन्दी फिल्मों के लिए भी उन्होंने कुछ बहुत नायाब गीत लिखे हैं| उनका एक शेर तो मुझे अक्सर याद आता है- ‘जब चला ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का शकील, मुझको अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया!’ लीजिए आज प्रस्तुत है शकील साहब की यह ग़ज़ल- सुब्ह…
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एक पूरा दिन!
गुलज़ार साहब हमारे देश के बहुत सृजनशील और प्रयोगधर्मी रचनाकार हैं| जहां फिल्मी दुनिया को उन्होंने बहुत से नायाब गीत दिए हैं वहीं जगजीत सिंह जी जैसे ग़ज़ल गायकों ने भी उनकी अनेक रचनाओं को अपना स्वर दिया है| लीजिए आज प्रस्तुत है गुलज़ार साहब की यह नज़्म- मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर…
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आज रात मैं लिख सकता हूँ!
आज भी मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की जो मूलतः चिले से थे, की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई कविता, के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित मूल कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज…
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आग अब भी कहीं दबी-सी है!
आज बिना किसी भूमिका के जावेद अख्तर साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| जावेद अख्तर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं और फिर कविता अपनी बात स्वयं कहती है| लीजिए प्रस्तुत है जावेद अख्तर साहब की यह ग़ज़ल- हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है,हँसती आँखों में भी नमी-सी है| दिन भी चुपचाप सर…
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आज मन भारी है!
स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के अनेक गीत मैंने पहले शेयर किए हैं, आज एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| अवस्थी जी भावुकता के अर्थात मन के कवि थे| कोई कवि अपनी कविताओं में वीरता बघार सकता है, परंतु मन की बात तो उसको भावुक होकर ही कहानी होगी| लीजिए प्रस्तुत है मन के व्यथित…
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चोट और टूटना दिल का!
जोश मलीहाबादी जी का प्रसिद्ध शेर है, जिसे गुलाम अली साहब ने एक ग़ज़ल के शुरू में गाया है- दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा, मैंने तुझे याद किया| वास्तव में जब सर्दी पड़ती है तब पुरानी चोटें भी कसकती हैं| हम अक्सर देखते हैं कि हमारे…
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वह चलती है, सुंदरता बिखेरते हुए!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- पिछले कुछ दिनों में मैंने लॉर्ड बॉयरन की कुछ कविताओं का भावानुवाद प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। कविता में एक खूबसूरती यह भी होती है कि हर कोई उसे अपनी तरह से समझ सकता है। आज फिर से…