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सौदा जिससे करने आये थे!
उसने कितने प्यार से अपना कुफ़्र दिया नज़राने में,हम अपने ईमान का सौदा जिससे करने आये थे| क़तील शिफ़ाई
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मेरे अन्दर चली थी आँधी—
मेरे अन्दर चली थी आँधी ठीक उसी दिन पतझड़ की,जिस दिन अपने जूड़े में उसने कुछ फूल सजाये थे| क़तील शिफ़ाई
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उसके नैन भर आये थे!
जाने वो क्या सोच रहा था अपने दिल में सारी रात,प्यार की बातें करते करते उसके नैन भर आये थे| क़तील शिफ़ाई
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हम जब उसके शहर से निकले—
हिज्र की पहली शाम के साये दूर उफ़क़ तक छाये थे,हम जब उसके शहर से निकले सब रास्ते सँवलाये थे| क़तील शिफ़ाई
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पत्र तुम्हारे नाम
आज एक बार फिर से हिन्दी के प्रतिष्ठित, लोकप्रिय और सुरीले गीतकार श्री सोम ठाकुर जी एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आदरणीय सोम जी ने देश प्रेम, भाषा प्रेम और शुद्ध प्रेम के भी अनूठे गीत लिखे हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है आदरणीय सोम ठाकुर जी का यह प्रेम से परिपूर्ण गीत- सुर्ख…
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मरने की आसानी दे मौला!
तेरे होते कोई किसी की जान का दुश्मन क्यों हो,जीने वालों को मरने की आसानी दे मौला | निदा फ़ाज़ली
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मीरा दीवानी दे मौला!
फिर मूरत से बाहर आकर चारों ओर बिखर जा,फिर मंदिर को कोई मीरा दीवानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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फिर रोशन कर ज़हर का प्याला
फिर रोशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें,झूठों की दुनिया में सच को ताबानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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सोच समझवालों को___
दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है,सोच समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली
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गुड़धानी दे मौला!
गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला,चिड़ियों को दाने, बच्चों को गुड़धानी दे मौला| निदा फ़ाज़ली