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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Dec 2021

    आग जलनी चाहिए!

    मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए| दुष्यंत कुमार

  • 17th Dec 2021

    ये सूरत बदलनी चाहिए!

    सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए| दुष्यंत कुमार  

  • 17th Dec 2021

    हर लाश चलनी चाहिए!

    हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए| दुष्यंत कुमार

  • 17th Dec 2021

    बुनियाद हिलनी चाहिए!

    आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए| दुष्यंत कुमार

  • 17th Dec 2021

    हो गई है पीर पर्वत-सी!

    हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए| दुष्यंत कुमार

  • 17th Dec 2021

    फसल काटती लड़की का गीत

    एक बार फिर से मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ, जो मेरे द्वारा किया गया एक प्रसिद्ध कविता का भावानुवाद है| आज विलियम वर्ड्सवर्थ की एक प्रसिद्ध कविता का सहज अनुवाद, हिंदी में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ। यह अत्यंत प्रसिद्ध रचना है, संभव है इस अनुवाद में कोई कमी…

  • 16th Dec 2021

    आप ही समझाता है !

    दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की,आप ही रोता है औ आप ही समझाता है । सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    चले जाते हैं अपनी धुन में!

    हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में,रास्ता है कि कहीं और चला जाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    फिर-फिर वही सन्नाटा है!

    देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    शोर उठता है कहीं दूर

    शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा,कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

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