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तुम्हारी मस्त नज़र!
आज मैं पुरानी फिल्म- ‘दिल ही तो है’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस फिल्म के नायक राज कपूर थे और उनकी नायिका नूतन थीं| इस फिल्म के लिए मुकेश जी ने ये प्यारा सा गीत गाया था| आज का यह गीत साहिर लुधियानवी जी का लिखा हुआ है और इसे रोशन जी…
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संबंध का काँवर न फेंक!
यह तेरी काँवर नहीं कर्तव्य का अहसास है,अपने कंधे से श्रवण! संबंध का काँवर न फेंक| कुंवर बेचैन
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मचलती नाव पर पत्थर न फेंक!
फेंकने ही हैं अगर पत्थर तो पानी पर उछाल,तैरती मछली, मचलती नाव पर पत्थर न फेंक| कुंवर बेचैन
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मौत का मंतर न फेंक!
हो सके तो चल किसी की आरजू के साथ-साथ,मुस्कराती ज़िंदगी पर मौत का मंतर न फेंक| कुंवर बेचैन
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चहचहाती बुलबुलों पर—
दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक,चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न फेंक| कुंवर बेचैन
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बस यही एक पल है!
आज मैं 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘वक़्त’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्मी गीतों में सभी प्रकार के दर्शन, हर प्रकार के विचारों, फलसफ़ों को अभिव्यक्ति दी जाती है, जैसे जो पार्टी एनिमल कहे जाते हैं, विलन और वेंप होते हैं, उनका अलग फलसफ़ा होता है| ऐसा ही फलसफ़ा इस गीत में…