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सर न कांधे से सहेली के उठाया होगा!
आज जिस गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, वह युद्ध की पृष्ठभूमि में बनी प्रसिद्ध फिल्म- ‘हक़ीक़त’ से है और इसको चार श्रेष्ठ पुरुष गायकों- मोहम्मद रफ़ी साहब, मन्ना डे साहब, भूपेन्द्र जी और तलत महमूद जी ने बड़े खूबसूरत अन्दाज़ में गाया है| कैफ़ी आज़मी साहब का लिखा यह गीत, अपने बोलों, श्रेष्ठ…
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मुबारक हो नया साल
आने वाले स्वागत, जाने वाले विदा, अगले चौराहे पर इंतजार शुक्रिया|नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं|
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समुंदर नज़र आया होगा!
अपने जंगल से जो घबरा के उड़े थे प्यासे,हर सराब उन को समुंदर नज़र आया होगा| कैफ़ी आज़मी
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जंगल तो पराया होगा!
बिजली के तार पे बैठा हुआ हँसता पंछी,सोचता है कि वो जंगल तो पराया होगा| कैफ़ी आज़मी
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लहू अपना पिलाया होगा!
बानी-ए-जश्न-ए-बहारां ने ये सोचा भी नहीं,किसने कांटों को लहू अपना पिलाया होगा| कैफ़ी आज़मी
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जब सर पे न साया होगा!
पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था,जिस्म जल जाएंगे जब सर पे न साया होगा| कैफ़ी आज़मी
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कभी पहले जैसे, मिला न हो!
डॉक्टर बशीर बद्र, आज की उर्दू शायरी में एक जाना-पहचाना नाम है| उनको विशेष रूप से शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाना जाता है| अनेक शेर उनके लोगों के ज़ेहन में छाए रहते हैं, जैसे ‘उजाले अपनी यादों के, हमारे साथ रहने दो’, ‘कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से, ये…
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तुझको भुला कर देखूं !
याद आता है के पहले भी कई बार यूं हीमैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूं | राहत इन्दौरी
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तेरे साये में आ कर देखूं!
तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज हैमैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूं | राहत इन्दौरी