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पूछो मेरे दिल से!
आज एक गीत फिल्म ‘अनिता’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की संगीतमय जोड़ी ने और गीत लिखा था राजा मेहदी आली खां साहब ने| मुझे यह गीत भी विशेष रूप से प्रिय है और आज भी यह हमारे मन में गूँजता रहता है|…
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भूलना आसान न था!
तुमसे छूट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था,तुमको ही याद किया तुमको भुलाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया!
मेज़ पर ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया,कोई खोने के लिए है कोई पाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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मोतियों वाले मौसम!
यूँ लुटाते न फिरो मोतियों वाले मौसम,ये नगीने तो हैं रातों को सजाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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कुछ हैं ज़माने के लिए!
हम हैं कुछ अपने लिए कुछ हैं ज़माने के लिए,घर से बाहर की फ़ज़ा हँसने-हँसाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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खो जाए तो सोना है!
दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है| निदा फ़ाज़ली
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बच्चे को हँसाया जाए!
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए| निदा फ़ाज़ली
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दुख ने दुख से बात की!
मैं रोया परदेस में, भीगा मां का प्यार, दुख ने दुख से बात की, बिन चिट्ठी बिन तार| निदा फ़ाज़ली