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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Jan 2022

    बोलते हैं सन्नाटे!

    रात भर बोलते हैं सन्नाटे,रात काटे कोई किधर तन्हा| गुलज़ार

  • 9th Jan 2022

    इस क़दर तन्हा!

    अपने साये से चौंक जाते हैं,उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा| गुलज़ार

  • 9th Jan 2022

    सफ़र तन्हा!

    ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,क़ाफिला साथ और सफ़र तन्हा| गुलज़ार

  • 9th Jan 2022

    सुहानी चांदनी रातें|

    आज एक गीत फिल्म ‘मुक्ति’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है राहुल देव बर्मन जी ने और गीत लिखा था आनंद बख्शी जी ने| मुकेश जी का यह रोमांटिक गीत आज भी हमारे मन में गूंजता रहता है| लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘मुक्ति’ के लिए मुकेश…

  • 8th Jan 2022

    जिएं तो अपने बग़ीचे में–

    जिएं तो अपने बग़ीचे में गुलमोहर के तले,मरें तो ग़ैर की गलियों में गुलमोहर के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    सिल दे ज़ुबान शायर की!

    तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    आवाज़ में असर के लिए!

    वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता,मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    आदमी का ख़्वाब सही!

    ख़ुदा नहीं न सही, आदमी का ख़्वाब सही,कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए!

    न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे,ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    साये में धूप लगती है

    यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है,चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए| दुष्यंत कुमार

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