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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd May 2026

    लाल पसीना!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – जहाँ गिरा है लाल पसीना ।वह काशी है, वही मदीना ।नाम देश का भले और होवह…

  • 2nd May 2026

    आहों पे और काम करूँ!

    हर एक साँस रगड़ खा रही है सीने में,और आप कहते हैं आहों पे और काम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 2nd May 2026

    कुछ इंतिज़ाम करूँ!

    ये सोचता हूँ चराग़ों का एहतिमाम करूँ,हवा को भूक लगी है कुछ इंतिज़ाम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 2nd May 2026

    पाँव दबाने लग जाएँ!

    मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से,ये जो लौंडे हैं मिरे पाँव दबाने लग जाएँ| महशर आफ़रीदी

  • 2nd May 2026

    ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए!

    ख़्वाब कुछ ऐसे दिखाए हैं फ़क़ीरी ने मुझे,जिन की ता’बीर में शाहों के ख़ज़ाने लग जाएँ| महशर आफ़रीदी

  • 2nd May 2026

    भीड़ में भी रहता हूँ!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के एक प्रसिद्ध गीत का पहला अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ – भीड़ में भी रहता हूँ वीरान के सहारे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******

  • 2nd May 2026

    ख़ुद को हम ढूँडने निकलें!

    हम वो गुम-गश्त-ए-मोहब्बत हैं कि तुम तो क्या हो,ख़ुद को हम ढूँडने निकलें तो ज़माने लग जाएँ| महशर आफ़रीदी

  • 2nd May 2026

    तुम बिन जीवन कैसे बीता!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, फिल्म-अनिता के लिए मुकेश जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे लिखा था राजा मेहदी अली खां जी ने और इसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोडी ने तैयार किया था। इस फिल्म के मुख्य कलाकार मनोज कुमार और साधना थे- तुम बिन…

  • 2nd May 2026

    राही से!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। माचवे जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की यह कविता  – इस मुसाफ़िरी का कुछ न ठिकाना भइया !याँ हार बन गया अदना दाना, भइया ।है पता न…

  • 1st May 2026

    आह-शुमारी ही सही!

    चलिए कुछ और नहीं आह-शुमारी ही सही,हम किसी काम तो इस दिल के बहाने लग जाएँ| महशर आफ़रीदी

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