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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Jan 2026

    घर की दहलीज़ पे!

    घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें,मुझ को मत रोक मुझे लौट के घर जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    सब कुछ सीखा हमने!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में एक और गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी ने अनाड़ी फिल्म के लिए गाया था- सब कुछ सीखा हमने, ना सीखी होशियारी! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********

  • 8th Jan 2026

    गोरे-गोरे चांद से मुख पर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज मुकेश जी का गाया ‘अनिता’ फिल्म का यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- गोरे-गोरे चांद से मुख पर काली-काली आंखें हैं आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 8th Jan 2026

    मुझ को गहराई में!

    मुझ को गहराई में मिट्टी की उतर जाना है,ज़िंदगी बाँध ले सामान-ए-सफ़र जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    शांत कदम – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 7th Jan 2026

    मैं तुम्हारा रहा!

    मैं तुम्हारा रहा रात भरकसमसाता रहा रात भर। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    कुर्सियाँ रह जाएँगी!

    क्यों बनाते हो सियासत को तुम अपना हम-सफ़र,सब चले जाएँगे लेकिन कुर्सियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    बोलियाँ रह जाएँगी!

    सिर्फ़ लफ़्ज़ों को नहीं अंदाज़ भी अच्छा रखो,इस जगत में सिर्फ़ मीठी बोलियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    बेड़ियाँ रह जाएँगी!

    इस नए क़ानून का मंज़र यही दिखता है अबपाँव कट जाएँगे लेकिन बेड़ियाँ रह जाएँगी। आदर्श दुबे

  • 7th Jan 2026

    तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं , अपने स्वर में कैफी आज़मी साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ जिसे ‘अर्थ’ फिल्म के लिए जगजीत सिंह जी ने गाया था- तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

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