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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Jan 2026

    सन्नाटा शहर में!

    आज फिर से मेरी एक पुरानी कविता प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बेहद ठंडा है शहरी मरुथललो अब हम इसको गरमाएंगे,तोड़ेंगे जमा हुआ सन्नाटाभौंकेंगे, रैंकेंगे, गाएंगे। दड़बे में कुछ सुधार होना है,हमको ही सूत्रधार होना है,ये जो हम बुनकर फैलाते हैं,अपनी सरकार का बिछौना है।चिंतन सन्नाटा गहराता है,शब्द वमन से उसको ढाएंगे।तोड़ेंगे जमा…

  • 10th Jan 2026

    देख ली दुनिया हमने!

    जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने,इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने| शहरयार

  • 10th Jan 2026

    अब तो हर वक़्त!

    हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है,अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें| शहरयार

  • 10th Jan 2026

    रोज़ जगाती है हमें!

    याद तेरी कभी दस्तक कभी सरगोशी से,रात के पिछले-पहर रोज़ जगाती है हमें| शहरयार

  • 10th Jan 2026

    दिन ढले यूँ तिरी!

    सुर्ख़ फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें,दिन ढले यूँ तिरी आवाज़ बुलाती है हमें| शहरयार

  • 10th Jan 2026

    सुंदर कांड-अंतिम भाग

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी द्वारा गाए गए सुंदर कांड के अंतिम भाग का कुछ अंश अपने स्वर मे प्रस्तुत कर रहा हूँ- विनय न मानहि जलधि जड़, गए तीन दिन बीत आशा है आपको यह पसंद आएगाधन्यवाद । ******

  • 10th Jan 2026

    ये ज़मीं चाँद से!

    ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें,ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें| शहरयार

  • 10th Jan 2026

    ख़ौफ़ में डूबे हुए !

    ख़ौफ़ में डूबे हुए शहर की क़िस्मत है यही,मुंतज़िर रहता है हर शख़्स कि क्या होता है| मुनव्वर राना

  • 10th Jan 2026

    कहीं दूर जब दिन ढल जाए!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में आनंद फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- कहीं दूर जब दिन ढल जाए! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ****

  • 10th Jan 2026

    दिल्ली! (कविता)

    आज मैं हिंदी के अत्यंत श्रेष्ठ कवि तथा राष्ट्रकवि के रूप में सम्मान पाने वाले स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक अलग किस्म की रचना शेयर कर रहा हूँ। दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता –…

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