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तू है जहाँ, वहाँ आ पाना!
आज स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| काव्य रचनाएं स्वयं अपना परिचय देती हैं, वैसे गीत अधिकतर भावुकता का ही व्यापार होते हैं, जैसे नीरज जी ने भी लिखा था- ‘हूँ बहुत नादान करता हूँ ये नादानी, बेचकर खुशियां खरीदूँ आँख का पानी’| खैर आज आप इस गीत में…