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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Sep 2022

    वंदना!

    एक बार फिर मैं आज हिन्दीदेश के राष्ट्रकवि के रूप में जाने गए, स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी का एक सुंदर वंदना गीत शेयर कर रहा हूँ|, स्वर्गीय द्विवेदी जी ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन तथा गांधी जी के बारे में अनेक महत्वपूर्ण कविताएं लिखी थीं, मैंने उनकी बहुत सी कविताएं पहले भी शेयर की हैं,…

  • 16th Sep 2022

    तुझसे कहा ना बहुत हुआ!

    लो फिर तिरे लबों पे उसी बेवफ़ा का ज़िक्र, अहमद-‘फ़राज़’ तुझसे कहा ना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    तेरा ठिकाना बहुत हुआ!

    क्या क्या न हम ख़राब हुए हैं मगर ये दिल, ऐ याद-ए-यार तेरा ठिकाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    मिलना मिलाना बहुत हुआ!

    अब तक तो दिल का दिल से तआ’रुफ़ न हो सका, माना कि उससे मिलना मिलाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    जान से जाना बहुत हुआ!

    अब क्यूँ न ज़िंदगी पे मोहब्बत को वार दें, इस आशिक़ी में जान से जाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    रब्त बढ़ाना बहुत हुआ!

    अब हम हैं और सारे ज़माने की दुश्मनी, उससे ज़रा सा रब्त बढ़ाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    वाक़िए का फ़साना बहुत हुआ!

    हम ख़ुल्द से निकल तो गए हैं पर ऐ ख़ुदा, इतने से वाक़िए का फ़साना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ!

    उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ, अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़

  • 16th Sep 2022

    करतूतों जैसे ही सारे काम हो गये!

    एक बार फिर मैं आज हिन्दी के एक श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय नईम जी का एक सुंदर नवगीत, बिना किसी भूमिका के प्रस्तुत कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नईम जी का यह नवगीत – करतूतों जैसे ही सारे काम हो गये,किष्किन्धा में लगता अपने राम खो गये। बालि और वीरप्पन से कुछ कहा…

  • 15th Sep 2022

    फिर मुलाक़ात होगी!

    मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी| बशीर बद्र

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