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तेरे शहर के लोग!
आज मोहसिन नक़वी जी की लिखी एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने गाया था| कई बार यही खयाल आता है कि श्री जगजीत सिंह जी जैसे लोकप्रिय गायक यदि नहीं होते तो इन महान शायरों की शायरी हम सब तक कैसे पहुँच पाती? एक प्रसंग याद या रहा…
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ये दुनिया सौ रंग दिखाती है!
हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है,रोकर कभी हंसती है हंसकर कभी गाती है,ये प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगडाई| अली सरदार जाफ़री