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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Apr 2022

    क्यों मेरे शेर हैं मक़बूल!

    मुझसे करते हैं “क़तील” इसलिये कुछ लोग हसद,क्यों मेरे शेर हैं मक़बूल हसीनाओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    मुहब्बत नहीं करने देते!

    हमको आपस में मुहब्बत नहीं करने देते,इक यही ऐब है इस शहर के दानाओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    किसी टूटे हुए दिल में होगा!

    वो ख़ुदा है किसी टूटे हुए दिल में होगा,मस्जिदों में उसे ढूँढो न कलीसाओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    मेरे हाथ की रेखाओं में!

    जिस बरहमन ने कहा है के ये साल अच्छा है,उसको दफ़्नाओ मेरे हाथ की रेखाओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    अब तो महंगाई के चर्चे हैं!

    हौसला किसमें है यूसुफ़ की ख़रीदारी का,अब तो महंगाई के चर्चे हैं ज़ुलैख़ाओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    बंट न जाये तेरा बीमार!

    जो भी आता है बताता है नया कोई इलाज,बंट न जाये तेरा बीमार मसीहाओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    मिलावट न करो छाँव में!

    ऐ मेरे हम-सफ़रों तुम भी थाके-हारे हो,धूप की तुम तो मिलावट न करो छाँव में| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Apr 2022

    वसंत आ गया!

    स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत जी द्वारा आपातकाल के दौरान लिखी गई ग़ज़लें तो व्यापक जन-समुदाय तक पहुंची हैं, जिनको ‘साये में धूप’ नाम से संकलित किया गया था|| लीजिए आज दुष्यंत कुमार जी की यह रचना ‘वसंत आ गया’ शेयर कर रहा हूँ, इस रचना में…

  • 19th Apr 2022

    बो न सके जो कभी सहराओं में!

    उनको भी है किसी भीगे हुए मंज़र की तलाश,बूँद तक बो न सके जो कभी सहराओं में| क़तील शिफ़ाई

  • 19th Apr 2022

    भँवर बांध लिये पाँवों में!

    रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में,हमने ख़ुश होके भँवर बांध लिये पाँवों में| क़तील शिफ़ाई

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