Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 26th Apr 2022

    अँधेरों को दिए जाते हैं!

    हम हैं एक शम्अ मगर देख के बुझते बुझते, रौशनी कितने अँधेरों को दिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 26th Apr 2022

    ये सज़ा कम तो नहीं है के!

    क्यूँ हमें मौत के पैग़ाम दिए जाते हैं, ये सज़ा कम तो नहीं है के जिए जाते हैं| शमीम जयपुरी

  • 26th Apr 2022

    यूँ ही दीवानी नहीं है!

    कोई तो बात है मेरे सुख़न में, ये दुनिया यूँ ही दीवानी नहीं है| राजेश रेड्डी

  • 26th Apr 2022

    ये वीरानी नहीं है!

    खु़दा अब ले ले मुझसे मेरी दुनिया,मेरे बस की ये वीरानी नहीं है| राजेश रेड्डी

  • 26th Apr 2022

    वो मिट जाता है इक दिन!

    जो दिखता है वो मिट जाता है इक दिन,नहीं दिखता वो, जो फ़ानी नहीं है| राजेश रेड्डी

  • 26th Apr 2022

    जानी पहचानी नहीं है!

    नज़र के सामने है ऐसी दुनिया,जो दिल की जानी पहचानी नहीं है| राजेश रेड्डी

  • 26th Apr 2022

    पशेमानी नहीं है!

    ये कैसा दौर है क़ातिल के दिल में,ज़रा सी भी पशेमानी नहीं है| राजेश रेड्डी

  • 26th Apr 2022

    नादानी नहीं है!

    निगाहों में वो हैरानी नहीं है,नए बच्चों में नादानी नहीं है| राजेश रेड्डी

  • 26th Apr 2022

    एक छोटी सी मुलाकात!

    स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी हिन्दी में अपनी तरह के एक अनूठे कवि थे| उनकी एक कविता जो अक्सर मुझे याद आती है, वह है- ‘उठ मेरी बेटी सुबह हो गई’ जिसमें एक लाचार पिता अपनी बच्ची को जीवन की कुछ समझाता है| लीजिए प्रस्तुत है, स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता, जिसका…

  • 25th Apr 2022

    मेरा रहबर लेके आया है!

    न मंज़िल है न मंज़िल की है कोई दूर तक उम्मीद,ये किस रस्ते पे मुझको मेरा रहबर लेके आया है| राजेश रेड्डी

←Previous Page
1 … 1,103 1,104 1,105 1,106 1,107 … 1,382
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar