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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th May 2022

    सत्य!

    बाबा नागार्जुन अपने समय के एक महत्वपूर्ण कवि रहे हैं, बड़े फक्कड़ अंदाज़ में बेबाक ढंग से अपनी बात रखते थे| आज की बाबा नागार्जुन जी की कविता, जैसा कि इसके कथ्य से ही स्पष्ट है, आपातकाल में लिखी गई थी| उस समय बाबा नागार्जुन जेल में भी रहे थे| लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा…

  • 6th May 2022

    तुमने भी अगर देखा है!

    क्या ग़लत है जो मैं दीवाना हुआ, सच कहना,मेरे महबूब को तुमने भी अगर देखा है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    मुश्किल से इधर देखा है!

    आज इस एक नज़र पर मुझे मर जाने दो,उसने लोगों बड़ी मुश्किल से इधर देखा है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    दीदा-ए-तर देखा है!

    हम पे हँसती है जो दुनियाँ उसे देखा ही नहीं,हमने उस शोख को जो दीदा-ए-तर देखा है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    तुम्हें एक नज़र देखा है!

    पहले सौ बार इधर और उधर देखा है,तब कहीं जा के तुम्हें एक नज़र देखा है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    गुनहगार की तरह!

    ‘मजरूह’ लिख रहे हैं वो अहल-ए-वफ़ा का नाम,हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह| मजरूह सुल्तानपुरी   

  • 6th May 2022

    निगाह-ए-यार की तरह!

    वो तो हैं कहीं और मगर दिल के आस पास,फिरती है कोई शै निगाह-ए-यार की तरह| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    दौलत-ए-बेदार की तरह!

    इस कू-ए-तिश्नगी में बहुत है के एक जाम,हाथ आ गया है दौलत-ए-बेदार की तरह| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    हर निगाह ख़रीदार की तरह!

    हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह,उठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 6th May 2022

    तुम जहाँ कहो!

    आज श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह जी के काफी नजदीक थे, वे साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक पदों पर भी आसीन रहे| भोपाल के भारत भवन की परिकल्पना भी वाजपेयी जी की ही थी जो आज साहित्य और…

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