-
खादी गीत
स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता एक बार फिर शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय द्विवेदी जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को उल्लेखनीय वाणी दी थी| लीजिए आज प्रस्तुत है, हमारे स्वाधीनता आंदोलन में खादी की विशेष भूमिका को रेखांकित करने वाली स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की कविता –…
-
बचकर निकलने लगते हैं!
बुरे दिनों से बचाना मुझे मेरे मौला,क़रीबी दोस्त भी बचकर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी
-
धूप पहनकर निकलने लगते हैं!
हसीन लगते हैं जाड़ों में सुबह के मंज़र,सितारे धूप पहनकर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी
-
घर निकलने लगते हैं!
पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं,ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं| राहत इन्दौरी
-
चाँद-सितारों का है मौला खैर!
और क़यामत मेरे चराग़ों पर टूटी,झगड़ा चाँद-सितारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी