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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Nov 2022

    अब कहाँ जा के साँस ली जाए!

    मौत का ज़हर है फ़ज़ाओं में, अब कहाँ जा के साँस ली जाए| राहत इन्दौरी

  • 20th Nov 2022

    दुश्मनों की भी राय ली जाए!

    दोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों की भी राय ली जाए| राहत इन्दौरी

  • 20th Nov 2022

    तुझे कैसे भूल जाऊँ!

    आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, दुष्यंत जी की बहुत सी ग़ज़लें और कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं, जैसा कि आप जानते हैं आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों के संकलन ‘साए में धूप’ से दुष्यंत जी को विशेष प्रसिद्धि मिली थी| लीजिए आज…

  • 19th Nov 2022

    अपनी नज़रों से गिरा था पहले!

    ब’अद में मैंने बुलंदी को छुआ, अपनी नज़रों से गिरा था पहले| राजेश रेड्डी

  • 19th Nov 2022

    जो पुराना है नया था पहले!

    जो नया है वो पुराना होगा, जो पुराना है नया था पहले| राजेश रेड्डी

  • 19th Nov 2022

    आईना मुझ पे हँसा था पहले!

    मैं ने तो ब’अद में तोड़ा था इसे, आईना मुझ पे हँसा था पहले| राजेश रेड्डी

  • 19th Nov 2022

    पेड़ ये कितना घना था पहले!

    रंग मौसम का हरा था पहले, पेड़ ये कितना घना था पहले| राजेश रेड्डी

  • 19th Nov 2022

    मौत आई ज़रा ज़रा करके!

    ज़िंदगी तो कभी नहीं आई, मौत आई ज़रा ज़रा करके| राजेश रेड्डी

  • 19th Nov 2022

    ज़िंदगानी का सामना करके!

    किसने पाया सुकून दुनिया में, ज़िंदगानी का सामना करके| राजेश रेड्डी

  • 19th Nov 2022

    हम चले दिल को रहनुमा करके!

    लोग सुनते रहे दिमाग़ की बात, हम चले दिल को रहनुमा करके| राजेश रेड्डी

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