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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Nov 2022

    हौसला करके ‘नहीं’ कहा जाए!

    हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए, कभी तो हौसला करके ‘नहीं’ कहा जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन!

    मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन, आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    आदमी में होते हैं दस बीस आदमी!

    हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिस को भी देखना हो कई बार देखना| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Nov 2022

    अधिकार सबका है बराबर!

    आज मैं हिन्दी गीतों के राजकुंवर की उपाधि से विभूषित स्वर्गीय गोपालदास ‘नीरज’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| हिन्दी काव्य मंचों पर और हिन्दी फिल्मों में भी अपनी धाक जमाने वाले नीरज जी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज…

  • 21st Nov 2022

    अब कारख़ाना चल रहा है!

    यहाँ इक मदरसा होता था पहले, मगर अब कारख़ाना चल रहा है| राहत इन्दौरी

  • 21st Nov 2022

    वही बूढ़ा बहाना चल रहा है!

    वही महशर वही मिलने का वा’दा, वही बूढ़ा बहाना चल रहा है| राहत इन्दौरी

  • 21st Nov 2022

    अभी पीना-पिलाना चल रहा है!

    समुंदर से किसी दिन फिर मिलेंगे, अभी पीना-पिलाना चल रहा है| राहत इन्दौरी

  • 21st Nov 2022

    बस आब-ओ-दाना चल रहा है!

    ज़ियादा क्या तवक़्क़ो हो ग़ज़ल से, मियाँ बस आब-ओ-दाना चल रहा है| राहत इन्दौरी

  • 21st Nov 2022

    सब कुछ पुराना चल रहा है!

    वही दुनिया वही साँसें वही हम, वही सब कुछ पुराना चल रहा है| राहत इन्दौरी

  • 21st Nov 2022

    नाटक पुराना चल रहा है!

    नए किरदार आते जा रहे हैं, मगर नाटक पुराना चल रहा है| राहत इन्दौरी

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