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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Jun 2022

    जलने का क़रीना मुश्किल है!

    वह शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से,बुझने का सलीका आसाँ है, जलने का क़रीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    इंसान का जीना मुश्किल है!

    जो ‘धर्म’ पै बीती देख चुके ‘ईमां’ पै जो गुज़री देख चुके,इस ‘रामो-रहीम’ की दुनिया में इंसान का जीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    अब चाके-दिले-इन्सानियत को!

    जब नाखूने-वहशत चलते थे, रोके से किसी के रुक न सके,अब चाके-दिले-इन्सानियत को सीते हैं तो सीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    इस दौर में जीना मुश्किल है!

    यह दौरे खिरद है, दौरे-जुनूं इस दौर में जीना मुश्किल है,अंगूर की मै के धोखे में ज़हराब का पीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    हमदम कोई हमराज़ भी है!

    दिल-ए-बेगाना-ख़ूँ, दुनिया में तेरा,कोई हमदम कोई हमराज़ भी है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    इसमें रूह की आवाज़ भी है!

    मेरी ख़ामोशि-ए-दिल पर न जाओ,कि इसमें रूह की आवाज़ भी है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है!

    नशेमन के लिये बेताब ताईर,वहाँ पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    ख़ामोशी भी है आवाज़ भी है!

    मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है,ये ख़ामोशी भी है आवाज़ भी है| अर्श मलसियानी

  • 24th Jun 2022

    ईश्वर!

    आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| जैसे ईश्वर हर जगह पहुँचने के लिए स्वतंत्र होते हैं उसी प्रकार कवि की स्वतंत्रता भी अनंत है| अब इस कविता में ही देखी सर्वेश्वर जी ने ईश्वर को कौन सी ड्रेस पहना दी और उससे क्या काम…

  • 23rd Jun 2022

    ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में!

    सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है| राहत इन्दौरी

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