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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Aug 2022

    रात गए तक क्यूँ जागे हो!

    काश कोई हम से भी पूछे, रात गए तक क्यूँ जागे हो| मोहसिन नक़वी

  • 5th Aug 2022

    क्या लिखते रहते हो!

    तेज़ हवा ने मुझ से पूछा, रेत पे क्या लिखते रहते हो| मोहसिन नक़वी

  • 5th Aug 2022

    सोचों में गुम रहते हो

    इतनी मुद्दत बा’द मिले हो, किन सोचों में गुम रहते हो| मोहसिन नक़वी

  • 5th Aug 2022

    दिल्ली की तस्वीर!

    स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे अत्यंत प्रिय नवगीतकार रहे हैं, जब कविता लिखना प्रारंभ किया था तब मैं उनके नवगीत अक्सर गुनगुनाया करता था| रंजक जी के अनेक नवगीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में बहुत से संस्मरण भी साझा किए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का…

  • 4th Aug 2022

    शबनम फूल के प्यालों में!

    यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम, जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में| बशीर बद्र

  • 4th Aug 2022

    चुटकी ले नर्म नर्म गालों में!

    रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा, जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में| बशीर बद्र

  • 4th Aug 2022

    जवाब क्या देते खो गए सवालों में!

    पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा, हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में| बशीर बद्र

  • 4th Aug 2022

    वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में!

    सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में, बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में| बशीर बद्र

  • 4th Aug 2022

    मुझे उन का कोई पता नहीं!

    इसी शहर में कई साल से मिरे कुछ क़रीबी अज़ीज़ हैं, उन्हें मेरी कोई ख़बर नहीं मुझे उन का कोई पता नहीं| बशीर बद्र

  • 4th Aug 2022

    जिसे मैंने चाहा मिला नहीं!

    ये ख़ुदा की देन अजीब है कि इसी का नाम नसीब है, जिसे तूने चाहा वो मिल गया जिसे मैंने चाहा मिला नहीं| बशीर बद्र

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