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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th May 2026

    ख़ाली कई मकान पड़े!

    किसी मकीन की आमद के इंतिज़ार में हैं,मिरे मोहल्ले में ख़ाली कई मकान पड़े| राहत इंदौरी

  • 20th May 2026

    ओ मेरी जोहरा ज़बीं!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- वक़्त का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मन्ना डे जी ने गाया था और जिसे बलराज साहनी जी पर फिल्माया गया था, गीतकार थे साहिर लुधियानवी और संगीत रवि जी का था- आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******

  • 20th May 2026

    नर हो, न निराश करो मन को!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा जिन्हें राष्ट्रकवि भी कहा गया, ऐसे स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।गुप्त जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी की यह प्रसिद्ध कविता- नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ…

  • 19th May 2026

    पाँव आसमान पड़े!

    उठे हैं हाथ मिरे हुर्मत-ए-ज़मीं के लिए,मज़ा जब आए कि अब पाँव आसमान पड़े। राहत इंदौरी

  • 19th May 2026

    मंज़र लहू-लुहान पड़े!

    हमारे शहर की बीनाइयों पे रोते हैंतमाम शहर के मंज़र लहू-लुहान पड़े। राहत इंदौरी

  • 19th May 2026

    ज़िंदगी में जान पड़े!

    सुकूत-ए-ज़ीस्त को आमादा-ए-बग़ावत कर,लहू उछाल कि कुछ ज़िंदगी में जान पड़े। राहत इंदौरी

  • 19th May 2026

    शायद मैं ज़िंदगी की सहर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में सुदर्शन फाकिर जी के दो और शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ जिन्हें जगजीत सिंह जी ने गाया है- शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद । ******

  • 19th May 2026

    सूरज ज़मीं पे आन पड़े!

    ये ख़ाक-ज़ादे जो रहते हैं बे-ज़बान पड़े,इशारा कर दें तो सूरज ज़मीं पे आन पड़े। राहत इंदौरी

  • 19th May 2026

    खिलौना जानकर तुम तो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म-खिलौना के लिए मोहम्मद रफी जी का गाया गीत अपने स्वर में शेयर कर रहा हूँ जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल इसके संगीतकार थे- खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़ जाते हो! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 19th May 2026

    हँसो भाई पेड़!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा नवगीत के प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। माहेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत- कहती है दूबहँसो भाई पेड़बाहर जितना देखते होधरती मेंधसों भाई पेड़ ।…

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