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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Aug 2022

    तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला!

    तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनिया, आज तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला| अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2022

    शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला!

    क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उससे, वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला| अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2022

    ग़ुंचा-ए-दिल में सिमट आने वाला!

    सुब्ह-दम छोड़ गया निकहत-ए-गुल की सूरत, रात को ग़ुंचा-ए-दिल में सिमट आने वाला| अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2022

    अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला!

    दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभाने वाला, वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला| अहमद फ़राज़

  • 31st Aug 2022

    शीशे की किरचें!

    आज फिर मैं एक वरिष्ठ कवि एवं नवगीतकार श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| किसी समय मैं हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की झारखंड स्थित मुसाबनी माइंस में हिन्दी अधिकारी था और बुदधिनाथ जी हमारे कलकत्ता स्थित मुख्यालय में हिन्दी विभाग में उच्च पद पर थे, इस प्रकार कई बार उनके सानिध्य…

  • 30th Aug 2022

    गाँव से जब भी आ गया कोई!

    मेरा बचपन भी साथ ले आया, गाँव से जब भी आ गया कोई| कैफ़ी आज़मी

  • 30th Aug 2022

    छोटा मोटा ख़ुदा गया कोई!

    वो गए जबसे ऐसा लगता है, छोटा मोटा ख़ुदा गया कोई| कैफ़ी आज़मी

  • 30th Aug 2022

    कबूतर उड़ा गया कोई!

    अब वो अरमान हैं न वो सपने, सब कबूतर उड़ा गया कोई| कैफ़ी आज़मी

  • 30th Aug 2022

    बेच के चेहरा खा गया कोई!

    ऐसी महँगाई है कि चेहरा भी, बेच के अपना खा गया कोई| कैफ़ी आज़मी

  • 30th Aug 2022

    सूरज को खा गया कोई!

    ये सदी धूप को तरसती है, जैसे सूरज को खा गया कोई| कैफ़ी आज़मी

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