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जो ख़्वाबों में मिरे!
जो ख़्वाबों में मिरे आ कर तसल्ली मुझ को देती थी,वो सूरत अब नज़र आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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अकेला पा के मुझको!
अकेला पा के मुझ को याद उन की आ तो जाती है,मगर फिर लौट कर जाती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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आज सुबह का गीत!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- वर्तमान बन रहा अतीत,ये है आज सुबह का गीत। पूंजी हमें मिली सपनों कीहर रस्ते पर साथ चले हैंहम जब गिरकर उठे राह मेंसदा हाथ में हाथ गहे हैं, झंडे और कनात नहीं हैंअपनी पूंजी, अपने गीत। एकाकी जीवन में हमनेडोर नहीं छोड़ी सपनों…
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मैं कैसे सो जाऊँ!
किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ,कोई शय दिल को बहलाती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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मिरे साथ जल न जाए!
मुझे फूँकने से पहले मिरा दिल निकाल लेना,ये किसी की है अमानत मिरे साथ जल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी
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दम निकल न जाए!
मिरी ज़िंदगी के मालिक मिरे दिल पे हाथ रखना,तिरे आने की ख़ुशी में मिरा दम निकल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी
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फिर सँभल न जाए!
अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी,तिरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर सँभल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी
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मिरे अश्क भी हैं इसमें
मिरे अश्क भी हैं इस में ये शराब उबल न जाए,मिरा जाम छूने वाले तिरा हाथ जल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी
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न झुकाओ तुम निगाहें!
मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए,न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी
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हम तेरे शहर में !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में ग़ुलाम अली जी की गाई ये प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह सिर्फ एक बार मुलाक़ात का मौका दे दे। आशा है आपको ये पसंद आएगा,धन्यवाद।