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कहानी को फिर लिखा जाए!
जुदा है हीर से राँझा कई ज़मानों से, नए सिरे से कहानी को फिर लिखा जाए| निदा फ़ाज़ली
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आग कहाँ क्यूँ पता किया जाए!
तुम्हारा घर भी इसी शहर के हिसार में है, लगी है आग कहाँ क्यूँ पता किया जाए| निदा फ़ाज़ली
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बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन!
मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन, आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन| निदा फ़ाज़ली
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आदमी में होते हैं दस बीस आदमी!
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिस को भी देखना हो कई बार देखना| निदा फ़ाज़ली
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बस आब-ओ-दाना चल रहा है!
ज़ियादा क्या तवक़्क़ो हो ग़ज़ल से, मियाँ बस आब-ओ-दाना चल रहा है| राहत इन्दौरी