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तेरा दर्द अब तक जागता है!
जिसे चौंका के तूने फेर ली आँख, वो तेरा दर्द अब तक जागता है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मोहब्बत को बड़ा धोका रहा है!
न जी ख़ुश कर सका तेरा करम भी, मोहब्बत को बड़ा धोका रहा है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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निगाहों को बड़ा धोका हुआ है!
हिजाबों को समझ बैठा मैं जल्वा, निगाहों को बड़ा धोका हुआ है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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कभी आँखों में आँसू आ गया है!
कभी ख़ुश कर गई मुझको तिरी याद, कभी आँखों में आँसू आ गया है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मेरी ज़िंदगी मुझ से ख़फ़ा है!
तिरा ग़म क्या है बस ये जानता हूँ, कि मेरी ज़िंदगी मुझ से ख़फ़ा है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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शब-ए-फ़ुर्क़त मुझे क्या हो गया है!
समझता हूँ कि तू मुझ से जुदा है, शब-ए-फ़ुर्क़त मुझे क्या हो गया है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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उस दिन!
काफी लंबे समय के बाद मैं एक बार फिर से अपने प्रिय फिल्मी गीतकार स्वर्गीय शैलेंद्र जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| लेकिन यह फिल्मी गीत नहीं है| शैलेंद्र जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शैलेंद्र जी का यह प्रेम गीत – उस दिन…
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चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया!
अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स, गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया| निदा फ़ाज़ली