Category: Uncategorized
-
मुझसे ही शरमाता है!
मुझ से मोहब्बत भी है उसको लेकिन ये दस्तूर है उसका, ग़ैर से मिलता है हँस हँस कर मुझसे ही शरमाता है| मुनीर नियाज़ी
-
उसका हाल मुझ सा है
उसको भी तो जाकर देखो उसका हाल भी मुझ सा है, चुप चुप रह कर दुख सहने से तो इंसाँ मर जाता है| मुनीर नियाज़ी
-
पीछे पीछे आता है!
अपने घर को वापस जाओ रो रो कर समझाता है, जहाँ भी जाऊँ मेरा साया पीछे पीछे आता है| मुनीर नियाज़ी
-
मसूरी यात्रा!
आज एक बार फिर से, किसी जमाने में कवि सम्मेलनों में हास्य कविता का ट्रेड मार्क रहे स्वर्गीय काका हाथरसी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| काका जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय काका हाथरसी जी की यह कविता – देवी जी कहने लगीं,…
-
किधर गए वो गुनहगार
‘क़तील’ जिन पे सदा पत्थरों को प्यार आया, किधर गए वो गुनहगार आओ सच बोलें| क़तील शिफ़ाई
-
नज़र है आइना-बरदार
छुपाए से कहीं छुपते हैं दाग़ चेहरे के, नज़र है आइना-बरदार आओ सच बोलें| क़तील शिफ़ाई
-
अगर ज़मीर है बेदार!
जो वस्फ़ हम में नहीं क्यूँ करें किसी में तलाश, अगर ज़मीर है बेदार आओ सच बोलें| क़तील शिफ़ाई
-
एक भी हसीं में नहीं!
बजा कि ख़ू-ए-वफ़ा एक भी हसीं में नहीं, कहाँ के हम भी वफ़ादार आओ सच बोलें| क़तील शिफ़ाई
-
वक़्त का हाकिम!
सुना है वक़्त का हाकिम बड़ा ही मुंसिफ़ है, पुकार कर सर-ए-दरबार आओ सच बोलें| क़तील शिफ़ाई
-
हमें गवाह बनाया है!
हमें गवाह बनाया है वक़्त ने अपना, ब-नाम-ए-अज़्मत-ए-किरदार आओ सच बोलें| क़तील शिफ़ाई