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कलाकार!
आज मैं श्री रामदरश मिश्र जी की एक ही शीर्षक से लिखी दो कविताएँ प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविताएँ – 1. छोटा हो या बड़ाकच्चा हो या पक्काझोंपड़ी हो या महल, घर तो घर होता हैआदमी…
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प्रेम प्रताप!
आज मैं हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष स्वर्गीय रामचन्द्र शुक्ल जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| नीरज जी की कविता मैं आज पहली बार शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामचन्द्र शुक्ल जी की यह कविता – जग के सबही काज प्रेम ने सहज बनाये,जीवन सुखमय किया शांति के स्रोत…