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शहर का शहर मुझे!
ये अजब साअत-ए-रुख़्सत है कि डर लगता है,शहर का शहर मुझे रख़्त-ए-सफ़र लगता है| अब्बास ताबिश
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कब तुम्हें इश्क़ पे !
कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हम ने,हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश
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आप आते हैं रुलाते हैं
शादी-ए-मर्ग का माहौल बना रहता है,आप आते हैं रुलाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश
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कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे-6
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं नीरज जी के इस लोकप्रिय गीत का अगला भाग अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, फिल्म-नई उमर की नई फसल के लिए यह गीत मोहम्मद रफी जी ने गाया था- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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मेरी आँखों से बहा !
मेरी आँखों से बहा करती है उन की ख़ुश्बू,रफ़्तगाँ ख़्वाब में आते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश
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दिल पे मुश्किल है बहुत!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******
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जाते हैं चले जाते हैं!
इस लिए अब मैं किसी को नहीं जाने देता,जो मुझे छोड़ के जाते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश
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एक सुनहली किरण उसे भी दे दो!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कीर्ति जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की यह कविता – एक सुनहली किरण उसे भी दे दोभटक गया जो अंधियारे के वन में,लेकिन जिसके मन में,अभी…
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आते हैं चले जाते हैं!
मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते हैं,हँस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं| अब्बास ताबिश