Category: Uncategorized
-
जैसे कोई जासूस चले!
सीने में दिल की आहट जैसे कोई जासूस चले,हर साए का पीछा करना आदत है हरजाई की| गुलज़ार
-
काल-कुएँ में गूँजती है!
नींद में कोई अपने-आप से बातें करता रहता है,काल-कुएँ में गूँजती है आवाज़ किसी सौदाई की| गुलज़ार
-
झुकी झुकी सी नज़र!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे अर्थ फिल्म के लिए जगजीत सिंह जी ने गाया था- झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****
-
तिनका तिनका काँटे तोड़े!
तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की,क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की| गुलज़ार
-
मैं तो था लाचार!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत– मैं तो था लाचार,प्यार ने तुमको क्यों मजबूर कर दिया?देखा चारों ओर तुम्हारेवरदानों…
-
उसी बाज़ार से हैं!
रूह से छीले हुए जिस्म जहाँ बिकते हैं, हम को भी बेच दे हम भी उसी बाज़ार से हैं| गुलज़ार
-
वक़्त के तीर तो !
वक़्त के तीर तो सीने पे सँभाले हम ने,और जो नील पड़े हैं तिरी गुफ़्तार से हैं| गुलज़ार
-
तुम्हारे खत में !
दाग देहलवी जी की लिखी ग़ज़ल जिसे ग़ुलाम अली जी ने गाया है उसके सिर्फ दो शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******