Category: Uncategorized
-
किसने ये बीमार किया
जाते जाते कोई हम से अच्छे रहना कह तो गया, पूछे लेकिन पूछने वाले किस ने ये बीमार किया| जाँ निसार अख़्तर
-
तेरी सोई आँखों ने तो!
पहले भी ख़ुश-चश्मों में हम चौकन्ना से रहते थे, तेरी सोई आँखों ने तो और हमें होशियार किया| जाँ निसार अख़्तर
-
जितने भी बदनाम हुए!
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया, जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया| जाँ निसार अख़्तर
-
उनको प्रणाम!
आज एक बार फिर मैं जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता- जो नहीं हो सके पूर्ण–काममैं उनको करता हूँ प्रणाम । कुछ कंठित औ’ कुछ लक्ष्य–भ्रष्टजिनके अभिमंत्रित तीर हुए;रण…
-
कोई सूरज मिरे!
लम्हा लम्हा रहे आँखों में अँधेरे लेकिन, कोई सूरज मिरे सीने में उभरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर
-
शहर दर शहर मैं!
मिट गया पर तिरी बाँहों ने समेटा न मुझे, शहर दर शहर मैं गलियों में बिखरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर
-
कोई साया मिरे बाज़ू से
रास्ते भर कोई आहट थी कि आती ही रही, कोई साया मिरे बाज़ू से गुज़रता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर
-
चाँद उतरता ही रहा!
रौशनी कम न हुई वक़्त के तूफ़ानों में, दिल के दरिया में कोई चाँद उतरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर
-
चाँद उतरता ही रहा!
रौशनी कम न हुई वक़्त के तूफ़ानों में, दिल के दरिया में कोई चाँद उतरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर
-
कोई सँवरता ही रहा!
दीदा ओ दिल में कोई हुस्न बिखरता ही रहा, लाख पर्दों में छुपा कोई सँवरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर