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बहाने आ जाते हैं!
हम भी ‘मुनीर’ अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे,होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds
हम भी ‘मुनीर’ अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे,होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी