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दिन यूं बे-रंगत हुए!
आज एक नई रचना शेयर कर रहा हूँ, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा। भावों के धनुष-बाण रहे अनछुएबेमतलब ही हम अस्तंगत हुए। थे कुछ तो अपना कहलाने वालेजब-तब इस मन को बहलाने वाले ऐसे एहसास सब दिवंगत हुए। सभी दिशाएं कोई धुन गाती थींकिसी भी बहाने लिपटी जाती थींकैसे ये दिन यूं बे-रंगत हुए। नए…
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बुलाने से पहिले!
जहाँ ग़म के मारों की महफ़िल लगी हो,वहाँ बंदा हाज़िर बुलाने से पहिले। बलबीर सिंह रंग
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कबूतरी को दाना!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अल्हड बीकानेरी जी की एक छोटी सी हास्य कविता अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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मुस्कराने से पहले।
फ़लक़ की निगाहें ठहरती नहीं हैं,ये क्या कर दिया मुस्कराने से पहले। बलबीर सिंह रंग
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प्यार का पहला खत!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे हस्तीमल हस्ती जी ने लिखा और जगजीत सिंह जी ने बहुत सुंदर तरीके से गाया था- प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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अलविदा श्रद्धेय!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता– अबकी बार लौटा तोबृहत्तर लौटूँगाचेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहींकमर में बाँधे लोहे की पूँछें…