Category: Uncategorized
-
कोई क़ीमत कभी लेते!
तुम ने जो तोड़ दिए ख़्वाब हम उन के बदले,कोई क़ीमत कभी लेते तो ख़ुदाई लेते| राहत इंदौरी
-
अँधेरों से कमाई लेते!
चाँद रातों में हमें डसता है दिन में सूरज,शर्म आती है अँधेरों से कमाई लेते| राहत इंदौरी
-
इश्क़ कुछ रोग नहीं!
कितना मानूस सा हमदर्दों का ये दर्द रहा,इश्क़ कुछ रोग नहीं था जो दवाई लेते| राहत इंदौरी
-
एक बार फिर शारजाह!
दुबई में यह दूसरा सप्ताहांत, था। इस बार हम लोग दुबई के अल फुरज़ान इलाके से कार द्वारा शारजाह गए, जबकि 9 वर्ष पूर्व जब हम आए थे, तब हम शारजाह में ही रहे थे। उस बार मैं लगभग हर दिन कॉर्निश अथवा वाटर फ्रंट तक जाता था, जो इस बीच और ज्यादा सुंदर और…
-
बर्फ़ की तरह दिसम्बर
बर्फ़ की तरह दिसम्बर का सफ़र होता है, हम उसे साथ न लेते तो रज़ाई लेते| राहत इंदौरी
-
अब उसे देखे हुए!
ये भी मुमकिन है कि मैं ने उस को पहचाना न हो,अब उसे देखे हुए कितने ज़माने हो गए| बशीर बद्र