Category: Uncategorized
-
उन्हीं गहराइयों में हूँ!
तू आ चुका है सत्ह पे कब से ख़बर नहीं,बेदर्द मैं अभी उन्हीं गहराइयों में हूँ| अहमद फ़राज़
-
मैं संग-ए-राह हूँ तो!
मुझ से गुरेज़-पा है तो हर रास्ता बदलमैं संग-ए-राह हूँ तो सभी रास्तों में हूँ अहमद फ़राज़
-
ऐसे ऐसे लोग रह गए-2
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकुट बिहारी सरोज जी की कल शेयर की गई व्यंग्य कविता का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऐसे ऐसे लोग रह गए-2 आशा है यह आपको पसंद आएगाधन्यवाद । ******
-
तेरे क़रीब आ के!
तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँमैं दुश्मनों में हूँ कि तिरे दोस्तों में हूँ अहमद फ़राज़
-
ठुमक ठुमक मत चलो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया यह मधुर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- ठुमक ठुमक मत चलो किसी का दिल तड़पेगा! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********
-
और सिर्फ़ शाएर तू!
‘फ़राज़’ तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया,ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू| अहमद फ़राज़
-
दीप भोर तक जले!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत– गगन की गोद में धरा, धरा पे तम पले,घोर तम की…
-
किसी की ख़ातिर तू!
फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़
-
क्या सोचता है आख़िर तू!
हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़
-
ऐसे ऐसे लोग रह गए-1
अपने यूट्यूब चैनल शॉर्ट के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की एक व्यंग्य कविता का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऐसे ऐसे लोग रह गए आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******