Category: Uncategorized
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तू हँस रहा है मुझ पे!
तू हँस रहा है मुझ पे मिरा हाल देख कर,और फिर भी मैं शरीक तिरे क़हक़हों में हूँ| अहमद फ़राज़
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न तुम हमें जानो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- ‘बात एक रात की’ का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने अपने ही संगीत निर्देशन में गाया था- न तुम हमें जानो, न हम तुम्हे जानें, मगर लगता है कुछ ऐसा! आशा…
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देखिये न मेरी कारगुज़ारी!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार, कवि और संपादक स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अज्ञेय जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है अज्ञेय जी की यह अलग किस्म की कविता– अब देखिये न मेरी कारगुज़ारीकि मैं मँगनी…
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होश ओ हवास में!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपनी एक छोटी सी कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसमें बताया गया है कि नेतागण अपनी स्थिति के संबंध में कितने बेखबर रहते हैं- कोई तो आसपास हो, होश ओ हवास में! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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तिरी महफ़िलों में हूँ!
बदला न मेरे बाद भी मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू,मैं जा चुका हूँ फिर भी तिरी महफ़िलों में हूँ| अहमद फ़राज़
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या दिल की सुनो दुनिया वालो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में अनुपमा फिल्म के लिए हेमंत कुमार जी का अपने संगीत में गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे कैफी आज़मी जी ने लिखा था-या दिल की सुनो दुनिया वालो या मुझको अभी चुप रहने दो! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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याँ लुट के भी वफ़ा के!
तू लूट कर भी अहल-ए-तमन्ना को ख़ुश नहीं,याँ लुट के भी वफ़ा के इन्ही क़ाफ़िलों में हूँ| अहमद फ़राज़
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मन है!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और नवगीत विधा के स्वर्णिम हस्ताक्षरों में से एक स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। माहेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत– आज गीतगाने का मन…
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कब से उदासियों के!
ऐ यार-ए-ख़ुश-दयार तुझे क्या ख़बर कि मैं,कब से उदासियों के घने जंगलों में हूँ| अहमद फ़राज़