Category: Uncategorized
-
क्यों आखिर क्यों?
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ संपादक एवं कवि स्वर्गीय कन्हैया लाल नंदन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैया लाल नंदन जी का यह गीत – हो गई क्या हमसेकोई भूल?बहके-बहके लगने लगे फूल! अपनी समझ में…
-
दिलासों से सहारों से!
ज़माने में कभी भी क़िस्मतें बदला नहीं करतीं,उमीदों से भरोसों से दिलासों से सहारों से| कैफ़ भोपाली
-
कुओं से पनघटों से!
हमेशा एक प्यासी रूह की आवाज़ आती है,कुओं से पनघटों से नद्दियों से आबशारों से| कैफ़ भोपाली
-
अदाओं से इशारों से!
कभी होता नहीं महसूस वो यूँ क़त्ल करते हैं,निगाहों, कनखियों से अदाओं से इशारों से| कैफ़ भोपाली
-
हमारे दाग़-ए-दिल!
हमारे दाग़-ए-दिल ज़ख़्म-ए-जिगर कुछ मिलते-जुलते हैं,गुलों से गुल-रुख़ों से मह-वशों से माह-पारों से| कैफ़ भोपाली
-
रौशनी आवाज़ देती है!
सुने कोई तो अब भी रौशनी आवाज़ देती है,पहाड़ों से गुफाओं से बयाबानों से ग़ारों से| कैफ़ भोपाली
-
फूलों से सितारों से!
उन्हें मैं छीन कर लाया हूँ कितने दावेदारों से,शफ़क़ से चाँदनी रातों से फूलों से सितारों से| कैफ़ भोपाली
-
हसीनों से रक़ीबों से!
तन-ए-तन्हा मुक़ाबिल हो रहा हूँ मैं हज़ारों से,हसीनों से रक़ीबों से ग़मों से ग़म-गुसारों से| कैफ़ भोपाली
-
श्याम रंग में रंगी चुनरिया!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ गीत कवि श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – श्याम रंग में रंगी चुनरियाकौन दूसरा तंग खिलेगा? बैठी हूँ मैं ठगी-ठगी-सीसोई-सोई, जगी जगी…