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सोच की दीवार से!
सोच की दीवार से लग कर हैं ग़म बैठे हुए,दिल में भी नग़्मा न कोई गुनगुनाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई
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मुझमें तुम गीत बन रहो!
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मुझमें तुम गीत बन रहो,मन के सुर राग में बंधें। वासंती सारे सपनेपर यथार्थ तेज धूप है,मन की ऊंची उड़ान हैनियति किंतु अति कुरूप है,साथ-साथ तुम अगर चलो,घुंघरू से पांव में बंधें। मरुथल-मरुथल भटक रहीप्यासों की तृप्ति कामना,नियमों के जाल में…
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ख़ुश-नवाओ चुप रहो!
तुम को है मालूम आख़िर कौन सा मौसम है ये,फ़स्ल-ए-गुल आने तलक ऐ ख़ुश-नवाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई
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आज मौसम पे तब्सिरा कर लें!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपनी ही लिखी एक ग़ज़ल के कुछ शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ-आज मौसम पे तब्सिरा कर लें! आशा है आपको पसंद आएंगे.धन्यवाद। *******
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रात का पत्थर!
रात का पत्थर न पिघलेगा शुआ’ओं के बग़ैर,सुब्ह होने तक न बोलो हम-नवाओ चुप रहो| क़तील शिफ़ाई
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तुम पुकार लो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में खामोशी फिल्म का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने इसे अपने ही संगीत निर्देशन में गाया था- तुम पुकार लो, तुम्हारा इंतज़ार है! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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तुम पुकार लो, तुम्हारा इंतज़ार है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में खामोशी फिल्म का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलज़ार साहब ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने इसका संगीत दिया था और इसको गाया भी था- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****
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अपने तमाशाइयों में हूँ!
ख़ुद ही मिसाल-ए-लाला-ए-सेहरा लहू लहू,और ख़ुद ‘फ़राज़’ अपने तमाशाइयों में हूँ| अहमद फ़राज़
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निरज-निर्भय -आशु कविता
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं स्वर्गीय निर्भय हाथरसी जी की एक आशु कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उन्होंन अपने और नीरज जी के संबंध में प्रस्तुत की थी- आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****