Category: Uncategorized
-
इंसाफ़ तिरे साथ है!
डरता है ज़माने की निगाहों से भला क्यों,इंसाफ़ तिरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले| साहिर लुधियानवी
-
तिरे ख़यालों से दूर जा के!
न सोचने पर भी सोचती हूँ कि ज़िंदगानी में क्या रहेगा,तिरी तमन्ना को दफ़्न कर के तिरे ख़यालों से दूर जा के| साहिर लुधियानवी
-
कभी मिलेंगे जो रास्ते में!
कभी मिलेंगे जो रास्ते में तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे,कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा तो चुप रहेंगे नज़र झुका के| साहिर लुधियानवी
-
न दिल को मालूम है!
तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन,न दिल को मालूम है न हम को जिएँगे कैसे तुझे भुला के| साहिर लुधियानवी
-
उमीद की बस्तियाँ!
बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के,मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी
-
जमुन-जल मेघ!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत- लौट आए हैं जमुन-जल मेघसिन्धु की अंतर्कथा लेकर । यों फले हैं टूटकर जामुनझुक गई आकाश की…
-
ज़िंदगी अब कहीं नहीं है!
तुम अपने क़स्बों में जा के देखो वहाँ भी अब शहर ही बसे हैं,कि ढूँढते हो जो ज़िंदगी तुम वो ज़िंदगी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर
-
वो आग बरसी है!
वो आग बरसी है दोपहर में कि सारे मंज़र झुलस गए हैं,यहाँ सवेरे जो ताज़गी थी वो ताज़गी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर
-
वरक़ पलटता हूँ मैं जो!
गुज़र गया वक़्त दिल पे लिख कर न जाने कैसी अजीब बातें,वरक़ पलटता हूँ मैं जो दिल के तो सादगी अब कहीं नहीं है| जावेद अख़्तर