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आभार!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। सुमन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की यह कविता – जिस जिससे पथ पर स्नेह मिलाउस उस राही को धन्यवाद।…
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वो क्यूँ गया है ये भी!
रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया,वो क्यूँ गया है ये भी बता कर नहीं गया| शहज़ाद अहमद
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टहलने जाना मुश्किल!
क़ातिल की नज़रों से हम महफूज़ कहाँ,सुबहो-शाम टहलने जाना मुश्किल है। शंभुनाथ तिवारी