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हम भी दुखी, तुम भी दुखी !
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।प्रभाकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत- रातरानी रात मेंदिन में खिले सूरजमुखीकिन्तु फिर भी आज कलहम भी दुखीतुम भी दुखी !…
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ऐसी रातें होती हैं!
क़िस्मत जागे तो हम सोएँ क़िस्मत सोए तो हम जागें, दोनों ही को नींद आए जिस में कब ऐसी रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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इस बदली हुई रुत में!
आँखों में कहाँ रस की बूँदें कुछ है तो लहू की लाली है,इस बदली हुई रुत में अब तो ख़ूनीं बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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तय करना हैं झगड़े!
तय करना हैं झगड़े जीने के जिस तरह बने कहते सुनते,बहरों से भी पाला पड़ता है गूँगों से भी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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दुनिया-ए-फ़िराक़ में!
उम्मीद का सूरज डूबा है आँखों में अंधेरा छाया है,दुनिया-ए-फ़िराक़ में दिन कैसा रातें ही रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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घिर घिर के बादल!
घिर घिर के बादल आते हैं और बे-बरसे खुल जाते हैं,उम्मीदों की झूटी दुनिया में सूखी बरसातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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दिल से बातें होती हैं!
जब वो नहीं होते पहलू में और लम्बी रातें होती हैं, याद आ के सताती रहती है और दिल से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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आँखों में अंधेरा!
आशोब-ए-जुदाई क्या कहिए अन-होनी बातें होती हैं,आँखों में अंधेरा छाता है जब उजाली रातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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जोश ए जवानी हाय रे हाय!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज एक बार फिर, अपने स्वर में मुकेश जी का गाया एक प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- जोश ए जवानी हाय रे हाय निकले जिधर से धूम मचाए। आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद।
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क़हर की रातें होती हैं!
जिन रातों में नींद उड़ जाती है क्या क़हर की रातें होती हैं,दरवाज़ों से टकरा जाते हैं दीवारों से बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी