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किसी की उदास आँखों में!
न जाने क्या है किसी की उदास आँखों में,वो मुँह छुपा के भी जाए तो बेवफ़ा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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जगत के कुचले हुए पथ पर!
आज मैं विख्यात व्यंग्यकार स्वर्गीय हरिशंकर परसाई जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। परसाई जी ने शायद अधिक कविताएं नहीं लिखी हैं और उनकी कोई रचना मैंने पहले शेयर नहीं की है।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिशंकर परसाई जी की यह कविता– किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझकोनहीं है पद चिह्न…
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बाज़ार की हवा न लगे!
वो फूल जो मिरे दामन से हो गए मंसूब,ख़ुदा करे उन्हें बाज़ार की हवा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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इतने सुकून से डूबो!
जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो,कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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शायद मुझे ज़माना लगे!
तुम्हारे बस में अगर हो तो भूल जाओ मुझे,तुम्हें भुलाने में शायद मुझे ज़माना लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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लफ्ज़ तोड़-मरोड़े !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में स्वर्गीय अल्हड बीकानेरी जी की यह हास्य रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ- लफ्ज़ तोड़-मरोड़े ग़ज़ल हो गई! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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रूह को रोग मोहब्बत!
रूह को रोग मोहब्बत का लगा देती हैं,सेहत-ए-दिल जो अता करती हैं बीमार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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कुछ शेर सुनाता हूँ मैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं ‘एक दिल सौ अफसाने’ फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया प्रसिद्ध गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- कुछ शेर सुनाता हूँ मैं, जो तुझसे मुख़ातिब हैं! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *******
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तलख़ी-ए-इंकार लिए!
नोक-ए-अबरू में कभी तलख़ी-ए-इंकार लिए,कभी घोले हुए शीरीनी-ए-इक़रार आँखें| अली सरदार जाफ़री