Category: Uncategorized
-
ख़ल्क़ कहती है जिसे!
ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का,एक गोशा है ये दुनिया इसी वीराने का| फ़ानी बदायुनी
-
मेरे दिल में सुरूर!
मेरे दिल में सुरूर-ए-सुब्ह-ए-बहार,तेरी आँखों में रात फूलों की| मख़दूम मुहिउद्दीन
-
मेरी कविता पुस्तक
मेरा काव्य संकलन ‘आसमान धुनिए के छप्पर सा’ अब एमेज़ॉन पर उपलब्ध है, इससे संबंधित पोस्टर यहाँ साझा कर रहा हूँ-
-
कविता की दुनिया!
आज प्रस्तुत है एक और गीतआप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- क्या कहने निकले थे,हमने क्या कह डाला है,कविता भी तो बंधु भयंकर गड़बड़झाला है। मेरे बस में नहीं कदपि यह खुद ही चलती है, कहीं सरकती, कहीं उछलतीकहीं बिछलती है, यह कविता की चंचलबछिया पीती हाला है। हाथ जोड़ बोला मैंनेकहना है सो कह तू,…