Category: Uncategorized
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इस को हँसने के लिए!
इस को हँसने के लिए तो उस को रोने के लिए,वक़्त की झोली से सब को इक कहानी चाहिए| मदन मोहन दानिश
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जागे कोई सोए कोई!
ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई,रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए| मदन मोहन दानिश
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तन चाहे कहीं भी हो मन है सफर में!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के गीत का अगला भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- तन चाहे कहीं भी हो मन है सफर में! आशा है आपको यह पसन्द आएगा,धन्यवाद। ******
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आरज़ू कल आग की थी!
और क्या आख़िर तुझे ऐ ज़िंदगानी चाहिए,आरज़ू कल आग की थी आज पानी चाहिए| मदन मोहन दानिश
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माना कि तेरे प्यार में!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का एक दर्द भरा गीत शेयर कर रहा हूँ जो रिलीज़ नहीं हो सकी फिल्म- शुभ चिंतक के लिए रिकॉर्ड किया गया थ, अंजान जी के लिखे इस गीत का संगीत जे. जगदीश जी द्वारा तैयार किया गया था- माना कि तेरे…
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लश्कर नहीं देखे जाते!
ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा,जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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फिर मुझको रसखान बना दे!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बेकल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बेकल उत्साही जी का यह गीत – माँ मेरे गूंगे शब्दों कोगीतों का अरमान बना दे .गीत मेरा बन जाये कन्हाई,फिर मुझको रसखान…
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सादा-मिज़ाजी से मिलो!
उस से मिलना है तो फिर सादा-मिज़ाजी से मिलो,आईने भेस बदल कर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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समुंदर नहीं देखे जाते!
भीगती आँखों के मंज़र नहीं देखे जाते,हम से अब इतने समुंदर नहीं देखे जाते| मेराज फ़ैज़ाबादी
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मन है सफर में!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के गीत ‘भीड़ में न भी रहता हूँ वीरान के सहारे‘ का अगला भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ- तन चाहे कहीं भी हो मन है सफर में! आशा है यह आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ******