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कोई नहीं लगा मुझे अपना-पराया!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के गीत का अंतिम भाग- कोई नहीं लगा मुझे अपना-पराया! आशा आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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गुज़रा हुआ ज़माना आता नहीं दोबारा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं पुरानी फिल्म- शीरीं फरहाद का यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे लता मंगेशकर जी ने गाया था- गुज़रा हुआ ज़माना आता नहीं दोबारा, हाफ़िज़ ख़ुदा तुम्हारा! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****
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गजरे का एक फूल!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री बालस्वरूप राही जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – पूजा की माला में कैसे तो गुँथ गयाएक फूल गजरे काअर्चना के बोलों से आ जुडीमुजरे…
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ताज़ा निशानी चाहिए!
कौन पहचानेगा ‘दानिश’ अब तुझे किरदार से,बे-मुरव्वत वक़्त को ताज़ा निशानी चाहिए| मदन मोहन दानिश
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जब सफ़र अपना है तो!
क्यूँ ज़रूरी है किसी के पीछे पीछे हम चलें,जब सफ़र अपना है तो अपनी रवानी चाहिए| मदन मोहन दानिश
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इस को हँसने के लिए!
इस को हँसने के लिए तो उस को रोने के लिए,वक़्त की झोली से सब को इक कहानी चाहिए| मदन मोहन दानिश