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अंतिम पर्दा – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद…
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हमें शुऊर-ए-जुनूँ है!
हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे,निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी
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वहीं डाल दी हैं बाँहें!
कभी जादा-ए-तलब से जो फिरा हूँ दिल-शिकस्ता,तिरी आरज़ू ने हँस कर वहीं डाल दी हैं बाँहें| मजरूह सुल्तानपुरी
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चूहेदानी भर गई!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं काका हाथरसी जी की यह हास्य कविता, अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- चूहेदानी भर गई, चूहे पकडे बीस! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ****
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वहीं इन की बारगाहें!
तिरे ख़ानुमाँ-ख़राबों का चमन कोई न सहरा,ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इन की बारगाहें| मजरूह सुल्तानपुरी
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कहीं जगमगा उठी हैं!
कहीं ज़ुल्मतों में घिर कर है तलाश-ए-दश्त-ए-रहबर,कहीं जगमगा उठी हैं मिरे नक़्श-ए-पा से राहें| मजरूह सुल्तानपुरी
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दुनिया में हमारा दिल ही तो है!
फिल्म ‘दिल ही तो है’ के शीर्षक से संबंधित दो बहुत खूबसूरत गीत साहिर लुधियानवी जी ने लिखे थे जिनको रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने अपने अनोखे अंदाज़ में गाया था। इनमें से एक गीत मैं आज, अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मस्ती के मूड में है- दिल…
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यूँही कब तलक ख़ुदाया!
ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें,यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म-ए-ज़िंदगी निबाहें| मजरूह सुल्तानपुरी
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उनको प्रणाम!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि बाबा नागार्जुन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। आगार्जुन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है जनकवि बाबा नागार्जुन जी की यह कविता– जो नहीं हो सके पूर्ण–काममैं उनको करता हूँ प्रणाम । कुछ कंठित औ’ कुछ…
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ले गया हमराह अपने!
ले गया हमराह अपने वो मकाँ और बाम-ओ-दर,है नज़र सब कुछ मगर इक बे-मकानी दे गया| नज़र कानपुरी