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223. लंदन की खुरचन!
शीर्षक पढ़कर आप सोच सकते हैं कि मैं किस डिश, किस व्यंजन की बात कर रहा हूँ और क्या ऐसी कोई डिश भी लंदन की विशेषता है! दरअसल मुझे तो किसी भी डिश की जानकारी नहीं है इसलिए ऐसी बात की तो उम्मीद न कीजिए। असल में जब किसी भी विषय में बातचीत का समापन…
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222. ये लंदन-वो दिल्ली!
काफी दिन पहले अपने एक भारतीय अखबार में छपा एक कार्टून याद आ रहा है। उस समय लंदन को दुनिया का सबसे खूबसूरत नगर घोषित किया गया था। कार्टून में एक घर का कमरा दिखाया गया था, जिसमें एक भारतीय सरदार जी का परिवार था, सामान इधर-उधर फैला था, कमरे के आर-पार डोरी टांगकर…
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221. सात बहनें, लंदन की!
लंदन प्रवास के अंतिम वीकएंड में हमारा प्रोग्राम बना ईस्टबाउंड स्टेशन के आसपास बसे ब्रिटेन के समुद्रतट और वहाँ दूर-दूर तक फैले हरियाली से भरे पहाड़ी क्षेत्र में यात्रा करने का। इस क्षेत्र में ‘लैंसडाउन’ नाम का एक होटल भी दिखा, शायद इस नाम का इलाका भी वहाँ है, ऐसा ही एक क्षेत्र अंग्रेजों…
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220. लंदन में इधर-उधर!
लंदन प्रवास अब खत्म होने को है। जो लोग लंदन की ज्योग्राफी समझते हों, उनके लिए बता दूं, कि मेरे बेटे का घर यहाँ पर ब्लू ब्रिज के पास, थेम्स नदी के किनारे है। यह स्थान ‘कोल्ड हार्बर’ है। जैसे यहाँ ‘व्हार्फ’ बहुत हैं, वैसे ही हार्बर भी बहुत हैं। हमको तो नदी किनारे घर…
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92. फिर से मेरा ख्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो!
आज फिर से आसान वाला रास्ता चुन रहा हूँ, जी हाँ प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अतीत में रहना अक्सर लोगों को अच्छा लगता है, मेरी उम्र के लोगों को और भी ज्यादा। कुछ लोग तो जब मौका मिलता है अतीत में जाकर दुबक जाते हैं, या ऐसा कहते रहते हैं, हमारे समय…
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217. ईटिंग ऑउट इन लंदन!
आज लंदन में कुछ और देखते हैं। इंसान जहाँ भी जाए, कुछ काम जो वो हर जगह करता है उनमें से एक है भोजन करना। और घर का भोजन कब तक चलता रहेगा भाई, कुछ तो बज़ार में भी चट्टन-वट्टन होना चाहिए। और हाँ महिलाओं के लिए एक गतिविधि, जो हर जगह होनी ही…
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218. ये कहानी फिर सही!
अभी लंदन में ही कुछ दिन और हूँ, और कुछ यहाँ के बारे में शेयर करने का मन होगा तो अवश्य करूंगा। एक बात अभी यही कहना चाहूंगा कि यहाँ कुत्ते खूब देखने को मिलते हैं, लेकिन सभी अपने स्वामी अथवा सेवक के साथ! सड़क पर कोई आवारा कुत्ता अभी तक तो नहीं मिला ,…
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216. टॉवर ब्रिज, लंदन का!
पिछली बार जैसा मैंने बताया था, निकले थे ‘लंदन आई’ और टॉवर ब्रिज देखने के लिए, लेकिन ‘लंदन आई’ की बात में ही लगा कि एक दिन के लिए इतना ही काफी है, क्योंकि ये उम्मीद तो की जाती है और ऐसा भी सोचना होता है कि उतना ही लिखा जाए जितना कोई एक…
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215. लंदन की आंख!
चलिए एक बार फिर से लंदन की यात्रा पर निकलते हैं। लंदन के बहुत सारे स्थान जैसा मैंने पहले बताया था, हमने क्रूज़ की यात्रा के दौरान देखे था। अब बारी थी इनमें से एक-दो को पास से देखने की। इसी प्रयास में हम कल ‘लंदन आई’ और ‘टॉवर ब्रिज’ की यात्रा में निकले।…
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91. हाथ खाली हैं मगर व्यापार करता हूँ!
आज फिर से लंदन में घूमे और विशेष रूप से ‘लंदन आई’ और टॉवर ब्रिज को देखा। लेकिन फिलहाल लिखने की हिम्मत नहीं है, शायद कल इस बारे में लिखूंगा। आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- बचपन में चंदामामा पत्रिका में विक्रम और वैताल की कहानियां पढ़ा करता था, जिनकी…