Category: Uncategorized
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95. तव मूरति विधु उर बसहि, सोई स्यामता आभास!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग याद कर लेते हैं। आजकल नियोजक अपने कर्मचारियों का चयन करते समय तथा बाद में अनेक अवसरों पर उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण करते हैं। श्रीराम जी को लंका पर चढ़ाई करनी थी और उससे…
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227. – वृहस्पति वाहन- टीवीएस जुपिटर!
आज मैं अपने सभी साथियों के साथ एक अलग प्रकार के अनुभव को साझा करूंगा, जो एक लंबे समय के बाद एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में जाने का अनुभव है। काफी समय तक मैं एक प्रतिष्ठित संस्थान एनटीपीसी से जुड़ा रहा, रिटायर होने के काफी समय बाद यह नया अनुभव बहुत अच्छा लगा। यह अनुभव है…
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226. टीवीएस जुपिटर- वृहस्पति यान!
टीवीएस जुपिटर के एक विज्ञापन में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, घर मे टीवीएस जुपिटर आने पर गुरू अर्थात वृहस्पति के आने की बात कहते हैं क्योंकि जुपिटर का वही अर्थ है, और इस प्रकार हम इसे वृहस्पति यान भी कह सकते हैं। और हम कुछ लोग गए बंगलोर के पास टीवीएस फैक्ट्री में,…
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226. अ. टीवीएस जुपिटर- वृहस्पति यान-1 !
हम ब्लॉगर साथियों की टीवीएस फैकट्री यात्रा से संबंधित कुछ और चित्र शेयर कर रहा हूँ- इसमें टेस्ट राइड ट्रैक और प्रतिभागियों, अतिथि ब्लॉगर्स और टीवीएस फैक्ट्री के अधिकारियों के चित्र हैं। टेस्ट राइड अतिथि ब्लॉगर, टीवीएस फैक्ट्री के अधिकारियों के साथ टेस्ट राइड से पहले बस में फैक्ट्री आते हुए। कुल मिलाकर…
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क्षमा याचना
तीन दिन के लिए बंगलौर में हूँ, इसलिए कोई पोस्ट देख अथवा लिख नहीं पा रहा हूँ, कल या परसों से ये सब काम करूंगा!
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225. ‘गो’ फिर ‘आ’- गोआ!
एक महीने के प्रवास के बाद लंदन से लौटकर गोआ आ गए। जेटलेग का प्रभाव भी समाप्त हो रहा है, वैसे मुझे लगता है कि ऐसे स्थान पर, इतना लंबा समय रहकर आओ तो जेटलेग शरीर से ज्यादा मन पर होता है। एक दूसरी ही दुनिया है लंदन या कहें कि ब्रिटेन, पता ही नहीं…
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94. मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो!
एक बार फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट, बस शीर्षक लाइन बदल दी है- आज शहरयार जी की एक गज़ल के बहाने आज के हालात पर चर्चा कर लेते हैं। इससे पहले दुश्यंत जी के एक शेर को एक बार फिर याद कर लेता हूँ- इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात अब किसी…
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93. मेरी बेबाक तबीयत का तकाज़ा है कुछ और!
लीजिए जी लंदन आउट, गोआ इन, हाँ जी मैं लौटकर गोआ वापस आ गया हूँ, क्योंकि बुद्धू हो या होशियार सबको लौटकर वापस आना पड़ता है। इस बारे में वैसे बेहतर कथन यह है- ‘जैसे उड़ि जहाज का पंछी, पुनि जहाज पर आवे’! हाँ तो, आज के लिए फिर से आसान वाला रास्ता चुन रहा…
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224. लंदन छूटा जाय!
एक महीने के प्रवास के बाद कल सुबह लंदन छोड़ देंगे। कल दोपहर की फ्लाइट यहाँ से है, सो सुबह ही घर छोड़ देंगे, हाँ उस समय जब भारत में दोपहर होती है। फिर मुंबई होते हुए, परसों सुबह गोआ पहुंचेंगे। बहुत लंबे समय तक यमुना मैया के पास, दिल्ली में यमुना पार- शाहदरा…