Category: Uncategorized
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सितारे शाम से पहले!
न जाने क्यूँ हमें इस दम तुम्हारी याद आती है,जब आँखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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उँगलियाँ थाम के खुद!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि, नवगीतकार तथा मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – उँगलियाँ थाम के खुद चलना सिखाया था जिसेराह में…
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कोहराम से पहले!
कोई कैसे करे दिल में छुपे तूफ़ाँ का अंदाज़ा,सुकूत-ए-मर्ग* छाया है किसी कोहराम से पहले|*सन्नाटा क़तील शिफ़ाई
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कोई आवाज़ आई थी!
गिरा है टूट कर शायद मिरी तक़दीर का तारा,कोई आवाज़ आई थी शिकस्त-ए-जाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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कोई गर्दिश नहीं थी!
ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वर्ना,कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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तड़पती हैं तमन्नाएँ!
तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले,लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-नाकाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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इक मौज दबे पाँव!
इक मौज दबे पाँव तआ’क़ुब में* चली आई,हम ख़ुश थे बहुत रेत की दीवार बना कर|*पीछे से क़तील शिफ़ाई
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तू न जिया न मरा – स्व. प्रेम शर्मा जी का गीत
आज एक बार मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से स्वर्गीय प्रेम शर्मा जी का एक गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, गीत के बोल हैं- ‘तू न जिया न मरा, ज्यों कांटे पर मछली, प्राणों में दर्द पिरा’ आशा है आपको पसंद आएगा।धन्यवाद
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हम लाए हैं घर में!
डर है कि न ले जाए वो हम को भी चुरा कर,हम लाए हैं घर में जिसे मेहमान बना कर| क़तील शिफ़ाई