Category: Uncategorized
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ये कहानी फिर सही!
इंसान के बारे में बहुत सारी विशेषताएं लोग समय-समय पर बताते हैं। उनमें से एक यह भी है कि वह एक सामाजिक प्राणी है, और सामाजिक होने का मतलब यह भी है कि वह एक प्रतिक्रियाशील प्राणी है, क्योंकि अगर वह किसी बात पर प्रतिक्रिया ही नहीं देगा, तब वह सामाजिक प्राणी भी कहाँ हुआ,…
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WOW: Questions in Life!
Life in itself is full of a series of questions. In the beginning of civilization or rather before that, when human beings came into existence, survival was the biggest question. There were the wild animals and the human beings and how the world of today evolved anybody can study and know all the details. …
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What’s wrong with Indian politics?
We Indians are the proud voters and masters of the biggest democracy in the world. After getting independence in 1947 we have made steady progress, which might be at a slower pace compared to some other countries, may be at higher pace compared to some others. Some of our problems were born with us, since…
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वो ख्वाब सुहाना बचपन का!
मैंने बचपन की बात करते हुए जगजीत सिंह जी के गाये हुए एक-एक गीत और गज़ल शेयर कर लिए हैं, तो मैं अपने परम प्रिय गायक मुकेश जी के एक अमर गीत को कैसे भूल सकता हूँ, जिसमें बचपन का एहसास बहुत खूबसूरत तरीके से कराया गया है। यह तो कहा जाता है कि अपने…
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जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं!
कल ही मैंने ‘पेरेंटिंग’ पर लिखी अपनी ब्लॉग पोस्ट के बाद बचपन की खूबसूरती, मदमस्ती और अलग ही दुनिया को याद करते हुए, श्री सुदर्शन फाकिर जी का लिखा गीत शेयर किया था। आज बचपन की ही खूबसूरती को दर्शाने वाली एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जनाब जावेद अख्तर साहब की लिखी हुई। बहुत…
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वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी!
अभी एक मंच पर सप्ताहांत में दिए जाने वाले विषय के अंतर्गत ‘पेरेंटिंग’ पर, आज के समय में अभिभावकों की भूमिका पर अंग्रेजी में कुछ लिखने का अवसर मिला। इस विषय में विचार किया तो खयाल आया कि कितना फर्क आ गया है, हमारे समय के बचपन से आज के बचपन में! वैसे फर्क जितना…
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मस्त पवन गाये लोरी!
सदाबहार गायक मुकेश जी के गाये गीतों के क्रम में आज जो गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, वह एक लोरी है, अलग तरह की लोरी, जो किसी बच्चे को नहीं अपितु दुखियारी नायिका को सुलाने के लिए गायी गई है। आज का गीत पुनर्जन्म की कथा पर आधारित फिल्म- ‘मिलन’ के लिए लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी…
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Parenting- then and now!
Today I have to discuss on a serious subject like- Parenting. Yes the need of taking parenting seriously was never as important, as it is today. I am now a grand- parent, but to tell the truth, I have never been a serious parent or now a grand-parent. I remember our childhood days, there was…
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52. पर हमें ज़िंदगी से बहुत प्यार था!
लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- मेरे एक पुराने मित्र एवं सीनियर श्री कुबेर दत्त का एक गीत मैंने पहले भी शेयर किया है, उसकी कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं- करते हैं खुद से ही, अपनी चर्चाएं सहलाते गुप्प-चुप्प बेदम संज्ञाएं, बची-खुची खुशफहमी, बाज़ारू लहज़े में, करते हैं विज्ञापित, कदम…
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51. लेकिन दृश्य नहीं बदला है !
लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज बहादुरी के बारे में थोड़ा विचार करने का मन हो रहा है। जब जेएनयू में, करदाताओं की खून-पसीने की कमाई के बल पर, सब्सिडी के कारण बहुत सस्ते में हॉस्टलों को बरसों-बरस पढ़ाई अथवा शोध के नाम पर घेरकर पड़े हुए, एक विशेष विचारधारा के विषैले प्राणी…